पृथ्वी के लिए

हरथालीएकजलवायुफ़ैसलाहै

दिल्ली की हवा, चेन्नई की प्यास, उत्तराखंड के बादल फटना, सुंदरबन का डूबना — सब एक ही कहानी के हिस्से हैं। और उस कहानी का सबसे बड़ा एक चैप्टर है: हम क्या खाते हैं।

कदम उठाएँ

आँकड़े

ग्लोबल वार्मिंग में खाने का हिस्सा

ग्लोबल खाद्य प्रणाली से दुनिया के कुल greenhouse gas emissions का लगभग 30% आता है। और इस 30% का सबसे बड़ा हिस्सा — पशुपालन। हर साल फ़ार्म के जानवर इतनी methane छोड़ते हैं कि वो दुनिया की सभी गाड़ियों, हवाई जहाज़ों और जहाज़ों के मिले-जुले प्रदूषण से ज़्यादा है।

Science journal में 2018 की एक 5-साल लंबी स्टडी (Joseph Poore, Oxford) ने 38,000 फ़ार्म्स का डेटा देखकर निष्कर्ष निकाला: एक व्यक्ति के लिए पर्यावरण पर अपनी छाप कम करने का सबसे बड़ा एक काम है — डेयरी और माँस छोड़ना। यह electric car से, कम flights से, recycling से — सब से बड़ा असर।

Beef cattle packed into a feedlot
Cattle feedlot, New Mexico. Photo: USDA / Wikimedia (Public Domain)
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ग्लोबल greenhouse gases — खाद्य प्रणाली से
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खेती की ज़मीन पशुपालन के लिए — खाने का सिर्फ़ 18% देती है
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1 किलो गोमाँस के लिए पानी
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Amazon वनों की कटाई — पशुपालन के लिए
"पृथ्वी हमारी ज़रूरतों के लिए काफ़ी है, हमारी लालच के लिए नहीं।" — महात्मा गांधी

पानी

भारत का सबसे क़ीमती संसाधन

भारत दुनिया का सबसे बड़ा भूजल उपभोक्ता है — दुनिया के कुल खपत का 25%। पंजाब के बहुत से ब्लॉक "dark zone" में हैं — पानी सूख रहा है। और इस पानी का बहुत बड़ा हिस्सा डेयरी और चारे की खेती में जाता है।

1 लीटर गाय का दूध बनाने में लगभग 1,000 लीटर पानी लगता है — गाय का पीने का पानी + चारे की खेती का पानी + सफ़ाई। 1 किलो पनीर के लिए ~5,000 लीटर। 1 किलो गोमाँस के लिए ~15,000 लीटर।

तुलना: 1 किलो दाल ~1,250 लीटर। 1 किलो चावल ~2,500 लीटर (और यह भी बहुत है)। 1 किलो सब्ज़ी ~300 लीटर।

1 किलो खाने के लिए पानी की खपत (लीटर)

गोमाँस100%
पनीर33%
चिकन30%
गाय का दूध (1 लीटर)7%
टोफ़ू13%
दालें8%
सब्ज़ियाँ2%

ज़मीन और जंगल

ज़मीन कहाँ जा रही है

दुनिया की कुल खेती की ज़मीन का 77% पशुपालन (चारा, चराई) के लिए इस्तेमाल होती है — और इससे दुनिया की सिर्फ़ 18% कैलोरी मिलती है। बाक़ी 23% ज़मीन से 82% कैलोरी मिलती है।

अगर दुनिया प्लांट-बेस्ड हो जाए, तो हम भारत+चीन+अमेरिका+EU जितनी ज़मीन के बराबर — वापस जंगल बनाने के लिए छोड़ सकते हैं।

वनों की कटाई

Amazon की 70% कटाई पशुपालन के लिए। भारत में भी मानगर, असम के जंगल चारे और पशुपालन के लिए घट रहे हैं।

मीथेन

गाय/भैंस के पेट से निकलती methane CO2 से 80 गुना ज़्यादा गर्म करती है। दुनिया की methane का 32% सिर्फ़ पशुपालन से।

हवा का प्रदूषण

पंजाब-हरियाणा में पराली, और साथ में डेयरी इंडस्ट्री का nitrogen oxide — सब मिलकर दिल्ली की हवा बर्बाद कर रहे हैं।

पानी का प्रदूषण

डेयरी फ़ार्म का गोबर और पेशाब — सीधे नदी/भूजल में जाता है, जिससे algal blooms और dead zones बनती हैं।

अनिश्चित बारिश

जलवायु बिगड़ने से monsoon अनियमित हो रहा है। 2023 में हिमाचल, उत्तराखंड, चेन्नई — सबने एक ही साल flood और drought झेला।

समुद्र का बढ़ता स्तर

2050 तक मुंबई, कोलकाता, चेन्नई के तटीय इलाक़े डूबने लगेंगे। सुंदरबन तो अभी से डूब रहा है।

समाधान

एक थाली — एक फ़ैसला

अगर एक भारतीय एक साल के लिए डेयरी और माँस छोड़ दे, तो वो लगभग 1.5 टन CO2-equivalent बचाता है — एक delhi-bombay flight के बराबर। साथ में लगभग 2 लाख लीटर पानी, और एक एकड़ ज़मीन के बराबर।

और यह आपकी जेब से बिजली, गाड़ी, या यात्रा में कुछ भी कम नहीं माँगता। बस थाली बदलती है।

हम मिट्टी से बने हैं, मिट्टी से खाते हैं, और मिट्टी में लौटते हैं। मिट्टी के साथ हमारा रिश्ता रोज़ की थाली में तय होता है।
वंदना शिवा

आम सवाल

जो आप पूछना चाहेंगे

अब क्या

आज एक छोटा कदम

आज की एक थाली डेयरी-फ़्री बनाएँ। एक हफ़्ते का नाश्ता प्लांट-बेस्ड। फिर एक महीना। फ़र्क आँकड़ों में नहीं दिखेगा — दिखेगा हवा में, पानी में, बच्चों के भविष्य में।

कार्बन पदचिह्न

एक थाली का प्रभाव

एक औसत मांसाहारी थाली — 7 kg CO₂eq।

एक वीगन थाली — 2 kg CO₂eq।

साल भर में अंतर — 1.5 टन CO₂, एक छोटी कार के एक साल चलने जितना।

जैव विविधता

मूक संकट

WWF Living Planet Report (2022) — पिछले 50 साल में वन्य जीव आबादी 69% कम हुई।

मुख्य कारण — पशुपालन के लिए वनों की कटाई और भूमि-उपयोग बदलाव।