
पोषण
विटामिन B12 का असली स्रोत: यह मांस नहीं है, बल्कि मिट्टी और सूक्ष्मजीवों की देन है
एक गहरी पड़ताल कि हमारे पोषण की सबसे बड़ी गलतफहमी कैसे पैदा हुई और प्रकृति में यह विटामिन वास्तव में कहाँ जन्म लेता है।
प्रकाशित 24 जून 2026 · 7 मिनट पठन
Image: AI-generated illustration · One Fork
अक्सर यह माना जाता है कि विटामिन B12 केवल पशु उत्पादों में पाया जाता है, लेकिन विज्ञान एक अलग कहानी बताता है। यह सूक्ष्मजीवों द्वारा बनाया जाने वाला एक चमत्कार है, जो आधुनिक स्वच्छता और औद्योगिक खेती के कारण हमारी थाली से दूर हो गया है।
जब हम पोषण की बात करते हैं, तो विटामिन B12 अक्सर चर्चा के केंद्र में होता है। इसे अक्सर 'एनीमल विटामिन' कहा जाता है, और लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि यह केवल मांस, डेयरी और अंडों में ही प्राकृतिक रूप से मौजूद होता है। लेकिन अगर हम जीव विज्ञान की गहराइयों में उतरें, तो एक आश्चर्यजनक सत्य सामने आता है: न तो गाय, न मुर्गी, और न ही मछली विटामिन B12 का निर्माण कर सकती है। वास्तव में, पृथ्वी पर एक भी पौधा या जानवर इस जटिल अणु को बनाने की क्षमता नहीं रखता है। विटामिन B12 का असली स्रोत जानवर नहीं, बल्कि मिट्टी और पानी में रहने वाले सूक्ष्मजीव (बैक्टीरिया और आर्किया) हैं।
विटामिन B12, जिसे वैज्ञानिक रूप से कोबालामिन (Cobalamin) के रूप में जाना जाता है, प्रकृति के सबसे जटिल गैर-बहुलक अणुओं में से एक है। इसके केंद्र में एक कोबाल्ट आयन होता है, और इसकी संरचना इतनी पेचीदा है कि इसे प्रयोगशाला में कृत्रिम रूप से बनाना लगभग असंभव था, जब तक कि 1972 में आर.बी. वुडवर्ड और अल्बर्ट एशेनमोसर ने इसे सफलतापूर्वक संयोजित नहीं किया। प्रकृति में, यह कार्य विशेष एंजाइमों से लैस सूक्ष्मजीवों द्वारा किया जाता है। जानवरों के शरीर में यह केवल इसलिए मिलता है क्योंकि वे इन बैक्टीरिया को अनजाने में निगल लेते हैं या उनके आंतों के माइक्रोबायोम में ये बैक्टीरिया मौजूद होते हैं।
सूक्ष्मजीवों की फैक्ट्री और प्राकृतिक चक्र
ऐतिहासिक रूप से, मनुष्यों और जानवरों को अपना B12 मिट्टी, खुले जल स्रोतों और बिना धुले फलों या सब्जियों से मिलता था। मिट्टी इन बैक्टीरिया का भंडार है। जब जंगली जानवर घास चरते हैं या प्राकृतिक जलाशयों से पानी पीते हैं, तो वे मिट्टी के कणों के साथ इन सूक्ष्मजीवों को भी ग्रहण करते हैं। जुगाली करने वाले जानवर (जैसे गाय और भेड़) अपनी आंत के पहले हिस्से, जिसे 'रुमेन' कहा जाता है, में इन बैक्टीरिया को पनपने देते हैं। यहाँ, बैक्टीरिया कोबाल्ट का उपयोग करके B12 का संश्लेषण करते हैं, जिसे बाद में जानवर अवशोषित कर लेते हैं।
मनुष्यों के मामले में, हमारी आंतों के निचले हिस्से (colon) में भी ये बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, लेकिन समस्या यह है कि B12 का अवशोषण छोटी आंत (small intestine) के ऊपरी हिस्से में होता है। इसलिए, हम अपने स्वयं के बैक्टीरिया द्वारा बनाए गए B12 का लाभ नहीं उठा पाते। पूर्व-औद्योगिक काल में, हमारे पेयजल और प्राकृतिक वातावरण में पर्याप्त सूक्ष्मजीव गतिविधि थी जो हमारी न्यूनतम आवश्यकताओं को पूरा कर सकती थी। लेकिन जैसे-जैसे हमने अपनी दुनिया को स्वच्छ बनाया है, हमने अनजाने में इस प्राकृतिक स्रोत को भी समाप्त कर दिया है।
आधुनिक कृषि और 'सप्लीमेंट' का भ्रम
आज के समय में एक आम तर्क यह दिया जाता है कि मांस खाना 'प्राकृतिक' है क्योंकि इसमें B12 होता है। लेकिन सच्चाई यह है कि आधुनिक औद्योगिक खेती (factory farming) ने जानवरों को भी उनके प्राकृतिक B12 स्रोत से काट दिया है। आज के अधिकांश पशु, विशेष रूप से सूअर और मुर्गियां, बंद बाड़ों में रहते हैं जहाँ उन्हें मिट्टी या प्राकृतिक चारा नहीं मिलता। परिणामस्वरूप, उन्हें अक्सर विटामिन B12 के सप्लीमेंट दिए जाते हैं या उनके चारे में कोबाल्ट मिलाया जाता है।
"यह समझना महत्वपूर्ण है कि मांस उद्योग वास्तव में एक बिचौलिया है। हम जानवरों को सप्लीमेंट खिलाते हैं ताकि उनके मांस में वह विटामिन जमा हो सके जिसे हम बाद में प्राप्त करते हैं। यह सीधे स्रोत से विटामिन लेने के बजाय एक अक्षम प्रक्रिया है।"
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता जोसेफ पूर (Joseph Poore) और थॉमस नेमेसेक (Thomas Nemecek) के 2018 के प्रसिद्ध अध्ययन 'Reducing food’s environmental impacts through producers and consumers' में बताया गया है कि मांस और डेयरी उत्पादन संसाधनों का अत्यधिक दोहन करते हैं। जब हम B12 के लिए मांस पर निर्भर होते हैं, तो हम वास्तव में एक ऐसे सप्लीमेंट चक्र का हिस्सा बन रहे होते हैं जो पर्यावरण पर भारी पड़ता है, जबकि हम वही पोषण सीधे सूक्ष्मजीव-आधारित सप्लीमेंट से प्राप्त कर सकते हैं।

स्वच्छता की कीमत: हम B12 क्यों खो रहे हैं?
बीसवीं सदी में स्वच्छता के क्षेत्र में हुई प्रगति ने हमें हैजा और टाइफाइड जैसी घातक बीमारियों से बचाया है, जो एक महान उपलब्धि है। क्लोरीनयुक्त पानी और कीटनाशकों के उपयोग ने हमारे भोजन को रोगाणुओं से मुक्त कर दिया है। हालांकि, इस 'अत्यधिक स्वच्छता' का एक दुष्प्रभाव यह हुआ कि मिट्टी के वे लाभकारी बैक्टीरिया भी लुप्त हो गए जो विटामिन B12 का उत्पादन करते थे।
लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी के एडवेंटिस्ट हेल्थ स्टडीज (Adventist Health Studies) ने दशकों तक शाकाहारी और मांसाहारी आबादी के स्वास्थ्य का विश्लेषण किया है। उनके शोध से पता चलता है कि आधुनिक दुनिया में, आहार चाहे जो भी हो, B12 की कमी एक व्यापक समस्या हो सकती है। यह केवल शाकाहारियों तक सीमित नहीं है। यहां तक कि मांस खाने वाले लोगों में भी अवशोषण की समस्याओं या उम्र के साथ पेट के एसिड में कमी के कारण इसकी कमी पाई जाती है। मैसाचुसेट्स फामिंगम हार्ट स्टडी (Framingham Heart Study) के अनुसार, लगभग 40% आबादी में B12 का स्तर इष्टतम से कम है, जो यह साबित करता है कि मांस खाना पर्याप्त सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
सप्लीमेंटेशन: सबसे सुरक्षित और प्रभावी मार्ग
विटामिन B12 सप्लीमेंट के बारे में एक आम गलतफहमी यह है कि ये 'अप्राकृतिक' या 'दवा' हैं। वास्तव में, सप्लीमेंट में मौजूद B12 ठीक उसी तरह बैक्टीरिया के किण्वन (fermentation) से बनाया जाता है जैसे कि योगर्ट या पनीर बनाया जाता है। यह सूक्ष्मजीवों द्वारा की जाने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसे नियंत्रित वातावरण में अंजाम दिया जाता है।
- मिथाइलकोबालामिन (Methylcobalamin): यह विटामिन का सक्रिय रूप है जो प्राकृतिक रूप से शरीर में पाया जाता है।
- साइनोकोबालामिन (Cyanocobalamin): यह सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला स्थिर रूप है, जिसे शरीर आसानी से सक्रिय B12 में बदल लेता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अकादमी ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स जैसे प्रमुख स्वास्थ्य संगठनों का मानना है कि फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ (जैसे प्लांट-बेस्ड मिल्क या फोर्टिफाइड अनाज) और सप्लीमेंट B12 प्राप्त करने के विश्वसनीय तरीके हैं। यह न केवल पशु क्रूरता को कम करता है, बल्कि संक्रमण के जोखिम और मांस में मौजूद संतृप्त वसा (saturated fats) से भी बचाता है।

भविष्य की दृष्टि: पोषण और विज्ञान
जैसे-जैसे हम भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं, यह स्पष्ट होता जा रहा है कि हमारे पोषण के स्रोत बदलेंगे। पौधों पर आधारित आहार की ओर झुकाव केवल एक नैतिक चुनाव नहीं है, बल्कि एक पारिस्थितिक आवश्यकता भी है। IPCC (Intergovernmental Panel on Climate Change) की रिपोर्टों में बार-बार रेखांकित किया गया है कि मांस की खपत कम करना जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक प्रभावी हथियार है।
विटामिन B12 की कहानी हमें यह सिखाती है कि प्रकृति में सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है। यह हमें याद दिलाता है कि हम अपनी सूक्ष्मजीव दुनिया (microbial world) पर कितने निर्भर हैं। जब हम यह समझ लेते हैं कि B12 का असली निर्माता मिट्टी का एक नन्हा जीवाणु है, तो 'विटामिन के लिए मांस जरूरी है' वाला तर्क स्वतः ही समाप्त हो जाता है। हम अपनी बुद्धि और विज्ञान का उपयोग करके उस पोषक तत्व को सीधे उसके स्रोत के करीब से प्राप्त कर सकते हैं, बिना किसी तीसरे जीव को नुकसान पहुँचाए।
निष्कर्षतः, विटामिन B12 की कमी को रोकने के लिए मांस खाना अनिवार्य नहीं है। अनिवार्य है जागरूक रहना। चाहे आप शाकाहारी हों या मांसाहारी, अपने B12 स्तरों की जाँच करवाना और आवश्यकतानुसार सीधे सूक्ष्मजीव-आधारित सप्लीमेंट लेना आधुनिक जीवनशैली में स्वास्थ्य बनाए रखने का सबसे वैज्ञानिक और मानवीय तरीका है।
स्रोत
- Reducing food’s environmental impacts through producers and consumers — Science (Oxford University Study)
- Vitamin B12 in Health and Disease — Nutrients (MDPI)
- B12 deficiency may be more widespread than thought — USDA Agricultural Research Service
- Position of the Academy of Nutrition and Dietetics: Vegetarian Diets — Journal of the Academy of Nutrition and Dietetics